Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full High Quality ★ Free
"इस गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो;
पाँचवाँ चैत्यवंदन यात्रा के अंतिम चरण में किया जाता है। इस चैत्यवंदन में सभी पाँचों चैत्यवंदनों का सार समाहित होता है और भक्त अपनी यात्रा को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
"शांति जिनेश्वर सोलहवाँ, अचिरासुत वंदो;
पालीताना का यह 5 चैत्यवंदन पाठ केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि भावयात्रा का माध्यम है। यदि आप पालीताना की यात्रा पर जा रहे हैं, तो मुख्य मंदिर की टूंक में और रायण पगला के पास बैठकर इन पाठों का गान अवश्य करें। यदि आप घर पर भी शत्रुंजय गिरिराज का चित्र सामने रखकर इन 5 चैत्यवंदन को पूरे भाव से पढ़ते हैं, तो आपको घर बैठे ही इस महातीर्थ की यात्रा का दिव्य फल प्राप्त होता है। palitana 5 chaityavandan in hindi full
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;
नाभिनंदन मरुदेवी सुत, युगादि देव कल्याणी।शत्रुंजय पर्वत सोहामणा, अमृत जैसी वाणी।।चौसठ इंद्र मली करी, कीधो जव अभिषेक।तस चरणी मस्तक नमुं, धरी भाव विशेष।।
सूरजकुंड सोहामणों, कावड यक्ष अभिराम;पांडव पांचे ज्यां गया, तेहने करूँ प्रणाम।जे नर ए गिरि चढे, निर्मल मन करी जोय;ते नर शिव सुख पामशे, फेर न भव-भव होय। "इस गिरि ऊपर आदिदेव
In the pilgrimage to Palitana (Shatrunjaya Mahatirth), performing five specific Chaityavandans is a core ritual for devotees. Each Chaityavandan is dedicated to a specific sacred spot or deity on the hill.
का मंदिर मुख्य आकर्षण है। यह पूरे परिसर का सबसे पवित्र मंदिर है, जो पहले तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) को समर्पित है। माना जाता है कि शत्रुंजय पहाड़ियों पर आदिनाथ के अलावा 100 मिलियन अन्य मुनिराजों ने भी मोक्ष प्राप्त किया था।
संक्षिप्त चैत्यवंदन विधि (सभी स्थानों के लिए) प्रभु प्रतिमा वंदो
"आदिदेव अलवेसरो, विनीता का राय;
नवाणु तीर्थयात्री सूर्योदय से लेकर देर दोपहर तक लगातार यात्रा करते हैं, उसके बाद वे दैनिक धर्मोपदेश सुनते हैं और शाम को सूर्यास्त से पहले दिन का एकमात्र भोजन ग्रहण करते हैं।
श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र की यात्रा और पाँच चैत्यवंदनों को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से तीर्थयात्री जीवन के परम लक्ष्य - - की प्राप्ति की ओर अग्रसर होते हैं।